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एक ज़िगज़ैग भट्ठे में ठोस ईंधन कैसे तैयार किया जाता है ?

एक ज़िगज़ैग भट्ठे में, ठोस ईंधनों या उनके उपयुक्त मिश्रण की झुकाई की जाती है, जिसमें कोयले, भूसा, चावल की भूसी, गेहूँ का भूसा, सरसों के डंठल, लकड़ी का बुरादा आदि शामिल हैं। कोयला ज़िगज़ैग भट्ठे में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला ईंधन है। अच्छी तरह से जलने के लिए, झोंका जाने वाला ईंधन छोटे आकार का होना चाहिए। भट्ठे में झुकाई के छिद्रों (शीर्ष पर स्थित) द्वारा ईंधन को छोटे चम्मच का उपयोग करके झोंका जाता है।

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ज़िगज़ैग भट्ठे में झुकाई के लिए किस आकार के कोयले की आवश्यकता होती है?

ज़िगज़ैग भट्ठे में झुकाई के लिए ईंधन के ढेर में बारीक पिसे से लेकर ½ इंच आकार तक के कोयले के कणों का मिश्रण होना चाहिए। जब सुझाये गए कोयले को झुकाई के लिए बने छिद्रों के माध्यम से थोड़ा-थोड़ा और लगातार झोंका जाता है तो पिसे कोयले के कण भट्ठे में गिरते हुए जलते हैं तथा बड़े कण तल पर गिरकर जलते हैं; जिसके परिणामस्वरूप भराई में नीचे से ऊपर तक ईंटें समान रूप से पकती हैं। इसलिए कोयले के बड़े और बारीक कणों की मात्रा और गुणवत्ता बहुत महत्त्वपूर्ण है।

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कोयले के सुझाये गए आकार को कैसे तैयार किया जाता है?

दहन प्रक्रिया के लिए अपेक्षित ईंधन के आकार को नियंत्रित करने के लिए प्राप्त किये गए कोयले को मशीनों द्वारा तोड़ा जाता है। ईंट भट्ठे में कोयले के आकार को छोटा करने के लिए सबसे अधिक प्रयोग में लाये जाने वाले उपकरण हैं – रोल क्रशर्स  तथा हैमर मिल्स

रोल क्रशर्स,  जिनका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है उनमे एक या दो रोल होते हैं। सिंगल रोलर क्रशर में कोयले के आकार को छोटा करने के लिए उसको एक चिकने/दांतेदार/नालीदार बेलनाकार रोल और एक स्थिर ब्रेकर प्लेट (बदली जा सकने वाली प्लेट) के बीच में डालकर पीसा जाता है जबकि, डबल-रोल क्रशर में, दांतेदार दो विपरीत दिशा में घूमने वाले बेलनाकार रोल के बीच में कोयले को डालकर पीसा जाता है। डबल-रोल क्रशर की क्षमता अधिक होती है तथा यह सिंगल-रोल क्रशर की तुलना में ईंधन को अधिक बारीक पीसने में सक्षम होता है लेकिन, यह महंगा होता है और इसका रख-रखाव कठिन होता है।

हैमर मिलें दो चरणों में कोयले के आकार को छोटा करती हैं। पहले घुमावदार हथौड़ों के गतिशील प्रभाव से और फिर हथौड़ा और ग्रिड या स्क्रीन प्लेटों के बीच कोयले के टुकड़ों के रगड़ने और टूटने के कारण उनके आकार में कमी होती है । जब तक कोयले के टुकड़े स्क्रीन प्लेटों से बाहर नहीं निकलते तब तक हथौड़े उन पर पर चोट करके उनको छोटे टुकड़ों में बदलते रहते हैं, और यह तब तक चलता रहता है जब तक कि वे ग्रिड प्लेटों से निकलने के लिए पर्याप्त छोटे नहीं हो जाते हैं। आमतौर पर हैमर मिल के उत्पाद में आकार की अच्छी एकरूपता मिलती है; उत्पाद की सूक्षमता को हैमर के घूमने की गति, कोयला डालने की दर, ग्रिड के मुहाने का आकार या हथौड़े और ग्रेट की सलाखों के बीच की दूरी के समायोजन से नियंत्रित किया जाता है।

ईंधन भंडारण का उचित तरीका क्या है और इसका पालन करना क्यों महत्वपूर्ण है?

ठोस ईंधन में भंडारण के दौरान गुणवत्ता में गिरावट आने और स्व-दहन की प्रवृति होती है। इसलिए, ईंधन का भंडारण उचित हवादार तथा तापमान और नमी नियंत्रित शेड के अंदर करना चाहिए। भंडारण की जगह का चबूतरा उचित जल निकासी प्रणाली युक्त कॉनक्रीट के उभरे हुए फर्श से बनाए जाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, कोयले का अनुचित भंडारण निम्नलिखित समस्याओं का कारण बनता है:

  1.  कोयले के साथ मिट्टी/राख का मिलना कैलोरिफिक वैल्यू (उष्मीय मान) और ईंधन की दहन क्षमता में गिरावट का कारण बनता है।
  2.  उच्च मात्रा में नमी होने से कोयले के कण अवांछनीय रूप से इक्कठे हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप, हाथ से झुकाई के समय कोयला ढेर के रूप में भट्ठे के तल पर गिरता है जहां इसको जलाने में कठिनाई होती है। कोयले में नमी के कारण ईंधन की खपत में भी वृद्धि होती है क्योंकि कोयले की नमी सुखाने के लिए अतिरिक्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
  3.  कोयले के चूरे को अत्यधिक विस्फोटक माना जाता है। यह वातावरण के तापमान में भी हवा में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करता है तथा इस प्रक्रिया के दौरान ऊष्मा पैदा होती है। यदि भंडारण क्षेत्र पर्याप्त रूप से हवादार नहीं है तो ऊष्मा संचित हो जाती है जिसके परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि होने से कोयले और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रिया निरंतर होती रहती है और आग कोयले के ढेर को नष्ट कर देती है। लिग्नाइट कोयले के भंडारण लिए सुरक्षित तापमान 50 डिग्री सेल्सियस है जबकि, बिटुमिनस कोयले के लिए यह 80 डिग्री सेल्सियस है।
    3.0 मिलीमीटर से कम कणों को छांट कर केवल बड़े आकार के कोयले का भंडारण करने की की सलाह जाती है। बिटुमिनस कोयले के ढेर का अधिकतम सुरक्षित आकार 200 टन और अधिकतम गहराई 2.5 मीटर होती है। लिग्नाइट कोयले के लिए अधिकतम सुरक्षित आकार 50 टन और गहराई 1.0 मीटर है।
  4. कोयले के कम तापमान में रासायनिक क्रिया के अन्य दुष्प्रभाव हैं – कोयले की कैलोरिफिक वैल्यू (उष्मीय मान) में कमी और कार्बन और हाइड्रोजन की मात्रा में कमी।
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